Monday, December 2, 2019

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कुछ मोमबत्तियो से फिर विरोध होगा
सडको पर कही भीड़ का फिर आक्रोश होगा
संसद में एक विवाद यह भी होगा
महिला सुरक्षा पर विचार थोड़ा और भी होगा

सजा नई कोई तय होगी
न्याय की तारिख की बात भी होगी
पर अँधेरे से अब वो थोड़ा और डरेगी
भीड़ में जब भी अकेली होगी तो बेचैन रहेगी
विश्वास न किसी अजनबी पर न अपनों पर करेगी
हौंसला तो स्वयं पर रखेगी पर संदेह दुनिया पर करेगी

उसके स्वाभिमान का खंडन अब जो और होगा
उसकी स्वतंत्रता का हनन अब जो फिर से होगा
उसके ह्रदय की ज्वाला से फिर ऐसा विध्वंस होगा
संसार अपने ही अस्तित्व का फिर वैरी होगा





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