Saturday, July 18, 2009

किनारा

मैं एक किनारा हूँ ,गंगा नदी का किनारामेरे ही ह्रदय को छू कर

तुम इस तरंगिनी को नमस्कार करते होमैं कही त्रिवेणी घाट हूँ ,

कहीं तुलसी घाट तो कहीं सिर्फ़ एक किनारामैं कहीं पूजनीय

हूँ तो कहीं उपेक्षित .मैं कही घिर गया हूँ श्रधालुओ की भीड़ से तो

कहीं खो गया हूँ सन्नाटे मेंमैं सहचर हूँ मन्दाकिनी का गोमुख

से बंगाल की खड़ी तक कासुरसरिता जब पूरे वेग से बहती है

तो मैं समां जाता हूँ इसी तटिनी मेंमैं भागिरिथी को तब से

जानता हूँ जब इसका जल व्योम सा नीला होता थासूर्य की

पहली किरण जब इस जलमाला पर पड़ती तो वातावरण

अभिमंत्रित हो जातानभचर भी इस बेला पर जैसे नाच उठते

मैंने देखा हैं गंगा की शान्ति को, गंगा की क्रिदाओ को और गंगा के

रुदन को भीमैंने देखा हैं मनुष्यो को गंगा के प्रकोप से काल का

ग्रास बनते हुएमैं साक्षी हूँ उनकी मृत्यु का पर दोषी नहीं

प्रतिदिन देखता हूँ हजारो लोग आते हैं देवनदी के दर्शन को, कुछ

जीवन का अनुष्ठान करने तो कुछ किसी आत्मा को विदा करने

यहाँ आने वाले गंगा की पूजा करते हैं ,गंगा को माँतुल्य कहते हैं

गंगा सब को आशीर्वाद देती हैं पर मैं रोते हूँ जब इन बच्चो को

अपनी ही माँ को दूषित करते देखता हूँतुम मेरे आंसू नहीं देख

सकते वो सम्मिलित हो जाते है गंगा में हीतुम मेरा दुःख नहीं

समझ सकते वो खो जाता है गंगा के प्रवाह में कहीं और मैं रह

जाता हूँ अनदेखा, अनसुना


मैं एक किनारा हूँ गंगा नदी का किनारा

Thursday, July 2, 2009

"The optimist proclaims that we live in the best of all possible worlds; and the pessimist fears this is true"

Anonymous

Wednesday, July 1, 2009

I,TREE

Now here when i stand

on the verge of my death

I see you laughing

I don't envy your laughter

but I do fear your tears.

I fought with the droughts

I had a battle with the floods

I gave up my beauty for your shelter

I sacrificed my children for your food.

You have eyes

but you cannot see my pain.

You have ears

but you cannot hear my cries.

And I have no eyes but

I can still visualize your dreadful future.

And I have no ears but

I can still hear that final bell ringing.

My worry is not my death

but my concern is your life.