Friday, June 17, 2011

पल बीते हुए


जीवन सागर में वो बूँद  बराबर
पल ही तो अनमोल है .
उन मधुर  स्मृतियो में जो सम्मोहन है
वो ही तो बांधे अब  तक  एक डोर है .
वो समय  जो बीत चला
उसमे ही तो सपनो का कोष है .

वो मनोभाव जिन्हें कभी शब्दों
में पिरोने की आवश्यकता न थी.
वो सुन्हेरे एहसास
जिनकी कोई अभिव्याक्ति न थी
और वो  समय से आगे बड़ने की
जब कोई महत्वकान्षा न थी .

उन्ही अमूल्य क्षड़ो  में है जैवज्योति सारी.
और उन्ही पलो में बिखरी  है मुस्कान सारी.











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