Monday, February 9, 2015

राजनीति का नया दौर

जो नहीं है दिल्ली में
वो भी जीत का आनंद जताए 
राजनीति का यह अलग अध्याय है 
परिवर्तन ही अब हर जगह स्थायी है 
कुछ ऐसी है बाजी पलटी 
मई में जिनकी अदभूत जीत थी 
अब शर्मसार उनकी हार है 
बदलाव ही आम आदमी की गुहार है
क्यूंकि आम आदमी को अब इस व्यवस्था से इंकार है




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