Saturday, December 31, 2016

एक वर्ष बाद

बात ये कुछ विपरीत हुई ।
वर्ष के आखिरी दिन में कविता ये पहली हुई ।
जीवन की व्यस्तता से विचारो में कुछ अव्यवस्था हुई।
कारणवश  लेखन में  हमारे थोड़ी बाधा हुई।
उत्प्रेरणा की तो कभी कोई अल्पता नहीं हुई।
पर शायद खयालो की थोड़ी स्वच्छंदता कम हुई।

अनुभव २०१६ में भी कई नवीन हुए।
पर शब्दो में ढलने में कुछ विफल हुए।
पुराने दृश्य कुछ और रंगीन हुए।
पर केवल फेसबुक की ही शान हुए।
फिल्म के साथ इस साल नोट भी बैन हुए।
पर ऐसे कार्यक्रम भी इस ब्लॉग से कुछ दूर हुए।

समय की तो हर वर्ष समानता ही हुई।
सम्भवतः इस वर्ष अलग कृत्यो की प्राथमिकता हुई।
















Wednesday, December 30, 2015

नववर्ष

नववर्ष का जश्न फिर शुरू हुआ
गत वर्ष ने यादो का नया पिटारा दिया

कही नई सीख कही पश्चाताप दिया
आगे बढ़ते रहने का उत्साह दिया

२०१६ का स्वागत  और अनोखा होगा
आने वाला साल और  भी आधुनिक होगा

कैलेंडर में जुड़ गया एक और साल
नए तजुर्बे से बंध गए जीवन के तार

आएंगे सारे त्योहार लेकर कुछ अलग बात
आएंगी ऋतुए दोबारा एक नई  ताज़गी के साथ

आने वाली सुबह और भी उजली होगी
मन की रौशनी की चमक नए साल में होगी



Saturday, August 1, 2015

...


आसमान को छूने की थी चाहत उसकी
पर धरती को समझने में ही बरसो बीत गए
कहा से आसान होगी डगर उसकी
यह जानने  में ही सादिया बीत गई
सपने तो बहुत थे आँखों में उसके
पर नींद से जागने में ही सुबह बीत गई
कदमो पर तो था भरोसा उसके
पर रास्ता मापने में ही जिंदगी बीत गई

हुनर से मंजिल को पाने के संघर्ष में
उसकी सफल होने की चाह बीत गई ।



Wednesday, April 15, 2015

...

बुद्धिबल अगर चाहिए
तो समझो एक उपाय
बुद्धि है तलवार सी
घिसे बार बार तो हुए तेज़ है धार।
जो जाननी है इच्छाशक्ति
तो देखो नदी का बहाव
चीर चट्टान जो है चली
अपने लक्ष्य की ओर।
जो हो जाओ लाचार
तो चलो चील की चाल
अपने पुनःजीवन के लिए
जो करे घोर संघर्ष।
चलो चील की चाल
और जीतो पूरा संसार। 

Friday, April 10, 2015

...

लकीरो से तो केवल धरती बटी है
आकाश भी कभी किसी सीमा में बंधा है
सम्भावनाओ के भंवर में तो केवल मस्तिष्क फसा  है
मन की आकांक्षाओं को कुछ सुध ही कहा है
कदमो ने तो केवल रास्ता मापा है
आसमान की उड़ान की कोई हद ही कहा है
आशंकाओ ने तो केवल वास्तविकता को जकड़ा है
सपनो पर कोई पाबन्दी कहा है ।



Wednesday, February 25, 2015

किस्से

किस्से जो कहानियो में मजा देते है
ध्यान से देखा तो सबके जीवन में ही गूंजते है 
बेशक पिरोता नहीं है उन्हें हर कोई कहानिओं में 
पर जीता है उन्हें हमेशा अपनी तन्हाईओं में 
लच्छेदार सी बातों में वो रोचक से किस्से 
कभी हंसी के तो कभी आंसुओ के किस्से 
है बड़े रसीले सभी ये किस्से
नहीं मिलेंगे किसी किताब में जो 
वो है तेरे मेरे जीवन के किस्से  । 









Monday, February 9, 2015

राजनीति का नया दौर

जो नहीं है दिल्ली में
वो भी जीत का आनंद जताए 
राजनीति का यह अलग अध्याय है 
परिवर्तन ही अब हर जगह स्थायी है 
कुछ ऐसी है बाजी पलटी 
मई में जिनकी अदभूत जीत थी 
अब शर्मसार उनकी हार है 
बदलाव ही आम आदमी की गुहार है
क्यूंकि आम आदमी को अब इस व्यवस्था से इंकार है