Monday, December 26, 2011

इस सही और गलत के  भवर के  पार
चाहे और अनचाहे सवालो से दूर 
इस सोच के समंदर के उस तरफ 
एक ज़िन्दगी का उगता हुआ सूरज है 
कुछ उमंगो के खिलते हुए फूल है 
एक सपनो की बगिया है 
आशाओ की ऊँची सी उड़ान है 
एक नई सी सुबह है 
एक ताजगी की महक है 


Saturday, December 24, 2011

किसी को पसंद है उजाले
तो किसी को ख्वाइश है अंधेरो की |

किसी को छूना है असमान को
तो किसी  की चाहतो में बस  ज़मीन है |

किसी को चमकाना है सितारे की  तरह
और किसी को खो जाना है गुमनामी में कही  |

किसी को रौशनी की उम्मीद है
और किसी को चमक से ही चुभन है |

किसी को सपनो की तलाश है
और किसी की सपनो की उड़ान है |










ज़िन्दगी खुद से ही जुदा हो रही कुछ ऐसे
चांदनी चाँद से खफा हो रही हो जैसे |
जो ख्वाबो में ही खुद से जुड़ा करती थी कभी
वो क्यूँ खुली आँखों से खोने लगी है अभी |

जिन जवाबो को तयार खड़े रखा था
सवाल उनके ही अब धूद्लाने लगे |
इस अकेले रस्ते पर चलते हुए
कुछ लोग  अब रास आने लगे |


पलकों की इस मुंडेर से
सपनो की चिडिया क्यूँ  उड़ाने लगे |
किसी बहाने से
इन आंसुओं को क्यूँ  छुपाने लगे |

नखरो की इस भाषा में
प्यार को क्यूँ  खोने लगे |
सिसकियो को नहीं समझे क्यूँ
और उन मुस्कुराहटो में बहने लगे |

तमन्नाओ के इस भवर में
अपेक्षाओ को क्यूँ  भूलने लगे |
अशाओ के इस समंदर में
निराशाओ को क्यूँ  खोजने लगे |


Friday, November 11, 2011

....

वो आने वाला पल
जो सदियो सा लम्बा है |
व़ो बीती हुई सदिया
जो पल से भी छोटी है |
क्यूँ प्यारी सी वो
बीती हुई कहानी है |
और क्यूँ अलग सा ये
आगामी सफ़र  है |
क्यूँ भाग रहे पीछे
एक मृगतृष्णा के |
और क्यूँ छोड़ रहे
पीछे वास्तुता को |

Tuesday, November 8, 2011

तो क्या बात हो

कुछ सपने की तरह
गुज़र जाए ये ज़िन्दगी तो क्या बात हो |

कुछ आंसुओ की तरह
बह जाए ये मुश्किले तो क्या बात हो |

पलक झपकते ही बदल
जाए ये कहानी तो क्या बात हो |

मंजिलो के मिलने में खो जाए कही
रास्ते  से  बिछड़ने का गम तो क्या बात हो |

दिल चाहे जो मिल जाए  वही
तो क्या बात हो |

थोड़ी सी खट्टी और बहुत सी मीठी
हो हर ज़िन्दंगानी तो क्या बात हो |




Thursday, October 20, 2011

रंग

जितने रंग है इन्द्रधनुष के
उससे भी ज्यादा रंगों में है इन्सान  यहाँ |

फासला बस एक समझ का है
न कोई सही न कोई गलत यहाँ |

विश्वास जो जीत सके
वही अपना  है यहाँ |

विचारधारा किसी की
कभी मिलती है कहा |

सोच सबकी इतनी
जुदा सी है |

जीने का अंदाज़ भी
इतना नया सा है |

उचित अनुचित
कुछ भी नहीं है यहाँ |

अगर इक दूजे के लिए
दिल में सही है वजह |

Sunday, October 16, 2011

कुछ नई पंक्तिया

1.हर एक गम का किनारा नहीं होता
   हर तरफ ख़ुशी का नज़ारा नहीं होता
   बीत जाए ये लम्हे कुछ ये दुआ है हमारी
   क्यूंकि हर बार वक़्त हमारा नहीं होता


2.जिंदगी ने जिसको जो जमीन बाटी
   उसको वही रास न आई
   जिसका जो सपना था
   वो किसी और ने ही जिया
   राहें तो कभी मेरी भी मुश्किल न थी
   फिर रास्ता तेरा ही क्यूँ हमेशा असान लगा


3.कुछ ख्वाब  जो   पलको की खिड़की से है झांकते
   कुछ सिसकियो  जो आवाज़ का दामन ही नहीं है थामती
   कुछ दायरे जो दायरों में ही नहीं है सिमटते
   कुछ खामोशियाँ जो आइने से  है ताकती